टेलिस्कोप के बारे में हिंदी में जानकारी – Telescope in Hindi

आज चन्द्रमा से लेकर करोडो प्रकाश वर्ष दूरी की आकाशगंगा तक इंसानो के आँखों की पहुंच में है। ये सिर्फ अत्याधुनिक Telescope (दूरदर्शी) की वजह से मुनकिन हो पा रहा है। पुराने समय में जिज्ञासु लोग अंतरिक्ष में अपने अस्तित्व के राज को ढूढ़ने की कोशिश करते थे। उनके लिए रातो में telescope से अंतरिक्ष को खंगालना एक मात्र चारा होता था। आज उन्ही लोगों की कोशिशों की बदौलत आधुनिक टेक्नोलॉजी इतनी आगे पंहुचा है। क्या आपको telescope के इतिहास के बारे में पता है, कैसे पहली बार लेंस से बना telescope, जो सौरमंडल तक सीमित था, आज रेडियो और IR telescope की शक्ल में अंतरिक्ष के अंत तक देख सकता है? आज हम आपको टेलिस्कोप के बारे में विस्तृत जानकारी हिंदी में बताने जा रहे हैं।

Telescope information in Hindi

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टेलिस्कोप क्या है और उसका डिज़ाइन? What is Telescope and its meaning?

Telescope एक ऐसी युक्ति है, जिससे दूर के वस्तुओ आसानी से देखा जा सकता है। इसमें लेंस या घुमावदार दर्पण लगे होते हैं, जो प्रकाश की किरणों को एक बिंदु पर केंद्रित कर देते हैं। जिससे वस्तुओ को बड़े आकार में देखा जा सकता है।
पहले के समय में telescope में वक्रीय काँच यानी लेंस का इस्तेमाल होता था, लेकिन आधुनिक समय में घुमावदार दर्पण का इस्तेमाल किया जाता है। दर्पण या लेंस की आकर के कारण प्रकाश एक बिंदु पर केंद्रित हो जाता है। लेंस के पहले दर्पण का इस्तेमाल इस लिए करते हैं, क्योंकि दर्पण को लेंस के बजाय, पूरी तरह से चिकनी सतह का बनाना आसान होता है, और दर्पण, लेंस से हल्के होते है, जिससे telescope के स्थान बदलने में या अंतरिक्ष में लॉच करने में दिक्कत नहीं होती।
telescope से बहुत दूर की चींजो को आसानी से देखा सकता है, दूर के वस्तु को जितना स्पष्ट देखना है, उतना बड़ा लेंस या दर्पण telescope में लगाना होगा। जिससे telescope में ज्यादा प्रकाश जाये और एक बिंदु पर केंद्रित हो सके। बड़े और मोटे लेंस दूर की वस्तुओ को देखने में सहायक होते हैं, जबकि दर्पण में ऐसा नहीं है, बड़े आकर होने के साथ दर्पण की मोटाई बढ़ाने की जरूरत नहीं है, बस वक्र सही होना चाहिए।

टेलिस्कोप की खोज: Who invented Telescope?

सर्वप्रथम telescope की खोज किसने की यह एक रहस्य ही बना हुआ है, ऐसा माना जाता है, 15वीं सदी में शायद कोई लेंस का उपयोग करके telescope की रचना सबसे पहले की थी। लेकिन दुनिया के सामने इसे ना लाने की वजह से आज कोई इसके बारे में जानता नहीं है।
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1608 में Netherlands के चश्मा बनाने वाले Hans Lippershey ने telescope के पेटेंट के लिए अर्जी डाली। यह पहली बार था जब कोई दुनिया के सामने telescope को रख रहा था। Hans Lippershey का कहना था उनकी यह युक्ति चीज़ो को तीन गुना बड़ा करके दिखाती है। Hans Lippershey ने telescope कैसे बनाया यह भी स्पष्ट नहीं है। कुछ का मानना है की Hans Lippershey ने दो बच्चो को दुकान में लेंस से खेलते देखा और उन्हें लेंस के पार की चींजे बड़ी दिखी जिससे उन्हें telescope बनाने का विचार आया। एक और कथन यह है की, Zacharias Jansen नाम के एक दूसरे चश्मे बनाने वाले से Lippershey ने telescope का आईडिया चुरा लिया था। Lippershey के पेटेंट की अर्जी करने के कुछ हफ्तों बाद netherlands के ही Jacob Metius नाम के एक आदमी ने telescope के पेटेंट की अर्जी डाली। Netherlands सरकार ने दोनों लोगों की अर्जी प्रति दावा की वजह से ख़ारिज कर दी, और बयान दिया कि इसे बनाना बहुत आसान है जो इसे पेटेंट कराने के लिए कठिन बना देता है। Netherlands की सरकार ने बाद में दोनों को कुछ धन जरूर दिए।
इसके बाद कुछ लोगो में  Telescope को लेकर उत्सुकता जरूर बढ़ी।

गैलिलियो गैलिली का प्रवेश- Astronomical Telescope in Hindi (History of Telescope in Hindi)

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गैलिलियो का पूरा नाम Galileo di Vincenzo Bonaulti de Galilei था, ये इटली के भौतिकशास्त्री व खगोलशास्त्र थे। गैलिलिओ को अवलोकन संबंधी खगोल विज्ञान का पितामह माना जाता है। गैलीलियो ने गति और वेग, गुरुत्वाकर्षण, जड़ता, प्रक्षेप्य गति का अध्ययन किया और विज्ञान और प्रौद्योगिकी में  काम किया, जिसमें पेंडुलम और हाइड्रोस्टेटिक संतुलन,आकाशीय पिंडों की खोज के लिए दूरबीन का का निर्माण आदि कार्य हैं। शुक्र के चरणों की दूरबीन की पुष्टि, बृहस्पति के चार सबसे बड़े उपग्रहों की खोज, शनि के छल्लों का अवलोकन और सूर्य के स्पॉट्स का विश्लेषण शामिल हैं।
 Netherlands के telescope के बारे में सुनकर 1609 में गैलिलियो ने कुछ ही दिनों में एक डिज़ाइन तैयार कर दिया, और दावा किया की उनके telescope से चींज़े 20 गुना बड़ी दिखती हैं। इसके बाद उन्होंने अपनी टेलिस्कोप वेनिस के सीनेट के सामने प्रस्तुत की। जिसके इनाम स्वरुप गैलिलियो को University Of  Padua में दुगुनी वेतन पर प्रवक्ता (Lecturer) की नौकरी मिल गयी।
1610 तक गैलिलिओ ने 30 गुना ज्यादा बड़ा वस्तुओं को दिखाने वाली telescope बना ली, जिससे गैलिलियो ने पहली बार चन्द्रमा पर पहाड़ों और गड्डो की खोज की। और उन्होंने वृस्पति और शनि के रिंग्स,यहाँ तक वृस्पति के चाँद को भी देखा। गैलिलियो की अंतरिक्ष में रूचि बढ़ती गयी। गैलिलियो ने भी Copernican Model को सही माना, जिसमे सूर्य को अंतरिक्ष का केंद्र माना गया था, और सारे ग्रह सूर्य की परिक्रमा एक सामान गति से करते हैं।
1632 में गैलिलिओ ने “Dialogue Concerning the Two Chief World Systems, Ptolemaic and Copernican” (“दो मुख्य विश्व प्रणालियों, टॉलेमिक और कोपरनिकन के संबंध में संवाद”) नामक पुस्तक लिखी, जिसमें उन्होंने Copernican Model को सही माना और अंतरिक्ष की कई जानकारियां दी। गैलिलिओ ने यह पुस्तक चर्च के पोप Urban VII को समर्पित की, लेकिन चर्च को इनकी पुस्तक लोगों को आस्था से भटकाने वाली लगी। उनके विचारों को विधर्मी माना गया, और गैलीलियो को 1633 में रोम में चर्च में अपना पक्ष प्रकट करने के लिए बुलाया गया। गैलिलिओ ने अपनी किताब के दलीलों को चर्च के सामने, धर्म से अलग बताते हुए प्रस्तुत किया। जिससे उनको काफी राहत मिली, और चर्च ने उन्हें घर में नजरबन्द रहने की सजा सुनाई। जहाँ पर उनकी जिंदगी के आखिरी साल बीते। अपनी जिंदगी के अंतिम बर्षो में उन्होंने अपना लिखना और अंतरिक्ष को समझना जारी रखा। घर में नजबंद के दौरान ही 1942 में  गैलिलिओ की मृत्यु हो गयी।

जोहन्स केप्लेर-Johannes Kepler

जोहान्स केप्लर का जन्म 27 दिसंबर 1571 को जर्मन राष्ट्रीयता रोमन साम्राज्य के वील डेर स्टैड, वुर्टेमबर्ग में हुआ था। वे बचपन में ज्यादा समय बीमार रहते थे, और उनके माता-पिता गरीब थे। लेकिन उनकी बुद्धिमत्ता ने उन्हें लुबेरन मंत्रालय के अध्ययन के लिए तुबिंगन विश्वविद्यालय में छात्रवृत्ति प्रदान की। वहाँ उन्हें कोपरनिकस के विचारों से परिचित कराया गया, जिनमे उनकी रूचि बढ़ी। 1596 में, ग्राज़ में गणित के शिक्षक रहते हुए, उन्होंने कोपरनिक सिस्टम, मिस्टेरियम कोस्मोग्राफिक की पहली मुखर रक्षा लिखी।
नए सुधार करते हुए केप्लेर ने उत्तल लेंस का इस्तेमाल करके, 1611 में telescope बनाया। जिससे देखने पर ज्यादा क्षेत्रफल दिखता था, और देखते समय आँखों में दिक्कत नहीं होती थी। दूरबीन के साथ, केप्लर कई बड़ी खोजों में आने में कामयाब रहे। उन्होंने “स्टार्सरी मैसेंजर के साथ वार्तालाप” लिखा, जिसमें उन्होंने गैलीलियो (बृहस्पति के 4 चंद्रमा) के निष्कर्षों की पुष्टि की, उन्होंने दोहरे उत्तल लेंस और दोहरे अवतल विचलन लेंस के सैद्धांतिक उपयोगों के बारे में लिखा।
केप्लेर ने ग्रहो के गति को लेकर 3 नियम दिए।
  1. ग्रह एक फोकस पर सूर्य के साथ दीर्घवृत्त में चलते हैं।
  2. त्रिज्या वेक्टर समान क्षेत्रों में समान समय का वर्णन करता है।
  3. आवधिक समय के वर्ग मीन दूरी के क्यूब्स के रूप में एक दूसरे के होते हैं।
केप्लर का निधन 15 नवंबर 1630 को रेजेंसबर्ग शहर में हुआ था, अपनी एक यात्रा के दौरान उन्होंने जनरल वालेंस्टीन को अपने मुख्य ज्योतिषियों में से एक के रूप में सेवा दी थी।
NASA ने केप्लेर के जीवनी में कहा था की, “यह केप्लेर के नियम थे, न कि एक सेब, जिसने न्यूटन को गुरुत्वाकर्षण के अपने नियम के लिए प्रेरित किया। केप्लर को वास्तव में खगोलीय यांत्रिकी का संस्थापक कहा जा सकता है।”

Reflecting telescope in Hindi

Telescope पर काम करते हुए 1668 में Isaac Newton ने दर्पण का इस्तेमाल करके telescope बनाया। जो प्रकाश के परावर्तन के नियम पर कार्य करती थी। Newton ने दर्पण का इस्तेमाल करना लेंस से ज्यादा सही पाया। आगे चलकर परावर्तित दर्पण ही आधुनिक telescope का आधार बना।

कैसी थी पुराने समय में अंतरिक्ष में खोज

आधुनिक अंतरिक्ष की खोजो की सारी शोध, पहले के खोजो के बदौलत मुमकिन हो पायी हैं। लेकिन पहले समय में अंतरिक्ष की खोज में बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ता था। पहली समस्या राजनीतिक रूप में दार्शनिको और खगोलशास्त्रियों को सामना करना पड़ता था। विज्ञान में किसी खोज पर चर्च और धार्मिक अनुयायियों को धर्म पर खतरा महसूस हो जाता था, यूरोप के देशो में चर्च का संसद पर पकड़ होती थी, इसीलिए वैज्ञानिक स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पाते थे। दूसरी समस्या यह थी की उस समय वैज्ञानिको के पास अच्छी telescope नहीं होती थी, लेंस या दर्पण को शुद्ध चिकना भी बनाने में दिक्कत होती थी। दर्पण में हुयी खरोंच की दिक्कत के कारण कुछ लाइने पड़ जाने के कारण कुछ खगोलशास्त्रीयो को चाँद पर नदी देखने का भ्रम होता था।

प्रशिद्ध Telescopes (Types of Telescopes)

हबल टेलिस्कोप-Hubble telescope in Hindi

यहाँ आप को हबल टेलिस्कोप के बारे में पढ़ने को मिलेगा (about Hubble Telescope in Hindi).
Hubble को 1990 में NASA द्वारा लॉन्च किया गया था। लांच करने के बाद यह देखा गया की, दर्पण में कुछ दिक्कत होने के कारण तस्वीरें साफ नहीं आ रही थी, महंगी लागत से बनने के बावजूद Hubble किसी काम का नहीं लग रहा था, इसीलिए NASA ने telescope की मरम्मत की योजना बनाई, और अंतरिक्ष में क्रू भेजकर इसकी मरम्मत की। यह पहली बार था, जब किसी telescope की अंतरिक्ष में मरम्मत हुयी हो। हबल ने शटल क्रू द्वारा पांच सर्विंग मिशन को अंजाम दिया, जो 2009 में आखिरी बार था।
इसके बाद Hubble ने कई महत्वपूर्ण योगदान देकर हमारी अंतरिक्ष को लेकर समझ बढ़ायी। इसमें ब्रह्मांड की आयु का निर्धारण अधिक सटीकता के साथ किया जाना, प्लूटो के पास अधिक चंद्रमाओं का पता लगाना, युवा ब्रह्मांड में आकाशगंगाओं का अवलोकन करना, बाहरी ग्रहों पर अंतरिक्ष के मौसम की निगरानी करना और यहां तक कि एक्सोप्लैनेट का अवलोकन करना शामिल है।

केप्लेर टेलिस्कोप-Kepler telescope

केप्लेर telescope तो 7 मार्च, 2009 को NASA के द्वारा लांच किया गया था, इस telescope का मुख्य उद्देश्य दूसरे स्टार-सिस्टम (तारामंडल) में उपस्थित ग्रहो की खोज करना था, केप्लेर से अब तक 4000 से ज्यादा ग्रहो का पता लगाया जा चुका है। केप्लेर telescope का नाम, खगोलशास्त्री केप्लेर के नाम पर, उनके भौतिकी में किए गए कार्यो की वजह से दिया गया। शुरुआत में, यह साइग्नस तारामंडल के एक भाग पर केंद्रित था, लेकिन 2013 से केप्लेर को एक ही जगह पर पॉइन्ट कराने के समस्या के कारण, अलग-अलग जगहों जो देखने में इस्तेमाल किया जाने लगा। केप्लेर का मुख्य मिशन पृथ्वी की तरह, रहने लायक ग्रह ढूढ़ना है।

जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप-James Web Space Telescope

यह हबल का उत्तराधिकारी है, इसे हबल के भविष्य में काम न कर पाने की स्थिति में लांच किया जाएगा। इसकी लॉन्चिंग तारीख को NASA कई दो बार आगे बड़ा चुका है, नयी तारीख के अनुसार जेम्स वेब को 30 मार्च, 2021 में लांच किया जायेगा। हबल के विपरीत, यह दूरबीन पृथ्वी से दूर और मरम्मत कर्मचारियों की पहुंच से बाहर की कक्षा में स्थापित किया जायेगा। इसका मिशन चार प्रमुख विषयों को देखना है, ब्रह्मांड की पहली रोशनी- यानि पहला सितारा कैसे बना, पहली आकाशगंगा कैसे बनी, तारे कैसे बनते हैं, और दुसरे ग्रहों पर जीवन की उत्पत्ति।

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