Shahbaz Ahmad

‘मेरा बेटा चार साल की उम्र से खेल रहा है क्रिकेट, मैं खुद उसके लिए गेंदबाज़ी करता था’, जानिए शाहबाज़ की दिलचस्प कहानी।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया को दिए गए इंटरव्यू में शाहबाज़ अहमद ने पिता ने अपने बेटे को लेकर एक बहुत ही प्यारी सी कहानी शेयर की है। उन्होंने कहा की शाहबाज़ चार साल की उम्र से क्रिकेट खेल रहा है। उन्हें उसके लिए गेंदबाज़ी करनी पड़ती थी। आगे शबाज़ के पिता कहते हैं की मैं खुद थक जाता था मगर वह नहीं थकता था। जब मैं थक जाता था तो खेल ख़त्म करने के लिए धीरे गेंद फेंकता था, शाहबाज़ उसे ज़ोर से मार देता था और खेल को वहीँ समाप्त करना पड़ता था। ऐसा करके मुझे आराम करने का मौका मिल जाता था।

बात 2016 की है जब बंगाल की अंडर 23 टीम रेलवे के खिलाफ सीके नायडू ट्रॉफी में खेल रही थी। उस दौरान शाहबाज़ ने बंगाल की टीम की तरफ से शानदार प्रदर्शन किया था। मैच के नायक शाहबाज़ ही थे। कोच ने जब बंगाल क्रिकेट के प्रेसिडेंट सौरव गांगुली से बात चीत की तो सौरव ने कहा की यह वही हरियाणवी लड़का है न जिसकी बात आपने मुझसे की थी। तब कोच साहब ने जवाब दिया हाँ यह सहबाज़ अहमद है।

सहबाज़ अहमद वैसे तो बंगाल से खेलते रहे हैं लेकिन वह हरयाणा के मेवात के रहने वाले हैं। अब जब उनका चयन भारतीय टीम में हो गया है तो सबसे ज्यादा खुश भी उनके बंगाल टीम के कोच ही हैं। शाहबाज़ के सेलेक्शंस की सबसे बड़ी वजह यह भी रही है की वे निरंतर अच्छी फॉर्म दिखाते हुए अपनी टीम के लिए हर सीजन में 1000 रन बनाते रहे हैं और 50 के लमसम विकेट भी झटकते रहे हैं। स्लो लेफ्ट एआरएम ऑर्थोडॉक्स गेंदबाज़ी करने वाले शाहबाज़ बल्लेबाज़ी भी शानदार तरीके से करना जानते हैं। शाहबाज़ अहमद आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर से खेलते हैं।

भारतीय टीम में सिलेक्शन हो जाने पर शाहबाज़ बेहद ही प्रशन्न हैं, वह कहते हैं की ‘जो भी खिलाड़ी क्रिकट खेलता है उसका यह सपना होता है की वह एक दिन भारतीय जर्सी पहने। भारतीय टीम के बुलावे से मैं काफी प्रशन्न हूँ।’

इंजीनियरिंग कर चुके हैं शाहबाज़

शाहबाज़ क्रिकेट खेलने के साथ ही साथ इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी करते थे। जब उनका मैच नहीं होता था तब वह किताबों में रमे रहते थे और सेमेस्टर परीक्षाओं की तैयारियां किया करते थे। उन्हें ज्योमेट्री और ट्रिगनोमेट्री से बेहद ही लगाव रहा है।

कहीं न कहीं इंजीनियरिंग की पढ़ाई ने भी उनके जीवन में ढेर सारी सीख दी है। यदि आपने पढाई अच्छे से की है तो आप खेल को भी अच्छे से समझ सकते हैं। जिस तरह इंजीनियरिंग में हर मोड़ पर समस्याएँ आती हैं, उसी तरह क्रिकेट में भी कई लम्हें आते हैं जहां पर सूझ बूझ से काम लेना पड़ता है। यदि विद्यार्थी इंजीनियरिंग को समझ सकता है तो वह क्रिकेट को भी समझने की काबिलियत रख सकता है। क्योंकि परिस्थिति को भांपने का काम दोनों जगहों पर होता है।

शाहबाज़ की तरह ही वेंकटेश अय्यर भी इंजीनियर रहे हैं जिन्होंने क्रिकेट की दीवानगी के कारण बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी ठुकरा रखी है।

आगे भी करना होगा कमाल

शाहबाज़ के नाम 57 फर्स्ट क्लास, 24 लिस्ट ए और 39 T20 विकेट हैं। यह उनका घरेलु रिकॉर्ड है। अब उनका सिलेक्शन भारतीय टीम में हुआ है इसलिए उन्हें और म्हणत करनी होगी और नए नए रिकॉर्ड बनाने होंगे।

रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की टीम में शामिल होने पर उन्हें वहां पर मौजूद क्रिकेटरों से खूब सीखने को मिला होगा, जिस कारण अब वह और भी बेहतर खिलाड़ी बन सकते हैं। उनके कोच लाहिरी कहते हैं की शाहबाज़ अब और भी बेहतर खिलाड़ी बनते जा रहे हैं। उनकी सीम में अब और भी ज्यादा घुमाव देखने को मिल रहा है।

कोच को भेंट करनी चाही कार

शाहबाज़ अहमद ने आईपीएल से मिली रकम से कार खरीदी और कोच के घर के सामने कड़ी कर दी। तब कोच ने कहा की आप इसे मेवात में लजाकर अपने माता-पिता को दें। शाहबाज़ से उनसे कहा की आप को इसे ऑफिस जाने के लिए इस्तेहमाल करना चाहिए। पीटीआई को दे रहे साक्षात्कार में यह सब बताते हुए कोच भावुक होगये।

कोच कहते हैं की मैंने उसकी सफलता का सारा श्रेय उसके पेरेंट्स को दिया है, क्योंकि उसकी परवरिश बहुत अच्छी हुई है। उसकी बहन एक मेडिकल की विद्यार्थी है। उसके दादा जी हेडमास्टर थे। उसके जीवन में कई प्रभावशाली लोगों का आशीर्वाद रहा है।

शाहबाज़ अहमद ने ड्रेसिंग रूम तक का रास्ता बना लिया है और उनके कोच का मानना है की वह दिन दूर नहीं जब वह बॉउंड्री तक अपना रास्ता बना लेंगें।