गगनयान मिशन क्या है? Gaganyaan Mission in Hindi

स्वतंत्रता दिवस के दिन 15 अगस्त 2018 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से बोला था कि,” देशवासियों और वैज्ञानिको के सपनों को पूरा करने के लिए, जब 2022 में आज़ादी के 75 साल पूरे होंगे या फिर 75 साल पूरे होने से पहले, माँ भारत का कोई संतान चाहे बेटा हो या बेटी, अंतरिक्ष में जायेंगे।’

इसी संकल्प को पूरा करने के लिए, खगोल के क्षेत्र में अपना लोहा मना चुकी भारतीय स्पेस एंड रिसर्च आर्गेनाईजेशन, ISRO (Indian Space and Research Organisation), पहली बार इंसानो को अंतरिक्ष में भेजने  जा रही है। इसके तहत ISRO, तीन स्पेसक्राफ्ट लांच करेगा, जिनमे शुरुआत के दो मिशन मानवरहित होंगे तथा आखिरी और तीसरा मिशन 3 अंतरिक्षयात्रियों  को अन्तरिक्ष में पहुचायेगा। 

mission gaganyaan kya hai? गगनयान मिशन क्या है?

मानवरहित मिशन की तारीख दिसंबर 2020, और जून 2021 रखी गयी है। तीसरे चरण में स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्षयात्रियों को पृथ्वी के सतह से 400 किमी की उचाई पर ले जाएगी, जहाँ पर गगनयान Gaganyan 6-7 दिनों तक पृथ्वी की परिक्रमा करेगा। Gaganyaan की लॉन्चिंग 2022 में निर्धारित की गयी है। इसके साथ ही अंतरिक्ष में भारत इंसान भेजने वाला चौथा देश बन जायेगा। इससे पहले सोवियत संघ रूस, सयुंक्त राष्ट्र अमेरिका और चीन ने ही अपने स्पेसक्राफ्ट से इंसानो को अंतरिक्ष में पहुंचाया है। 

हालाँकि जून, 2020 में आयी खबर के मुताबिक, कोरोना वायरस से फैले महामारी कोविड-19 के कारण, मानवरहित मिशन के लॉन्चिंग की तारीख आगे बढ़ने के संकेत मिले हैं। लेकिन तीसरे चरण के लॉन्चिंग में देरी होने की सम्भावना कम है। 

गगनयान (Gaganyaan) के लिए अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग 

अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिगं केलिए इसरो और गावकोस्मोस के बीच 27 जून 2019 को एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुआ था। जिसके फलस्वरूप 10 फरवरी, 2020 से गागरिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर (GCTC) ने भारत द्वारा चुने गए चार अंतरिक्ष यात्रियों को ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया। गावकोस्मोस, Russian state space corporation की एक सहायक कंपनी है।

भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग, रूस में गागरिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर (GCTC) में चल रही है, जहाँ वे सोयूज एमएस चालक दल के सामान्य अंतरिक्ष प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में जानकारी ले रहे हैं। जीसीटीसी में उनके प्रशिक्षण को 2021 की पहली तिमाही में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 

गावकोस्मोस ने 5 सितम्बर, 2020  को जानकारी दी कि, सभी अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य की निगरानी हर रोज रखी जा रही है, और हर तीन महीने में GCTC के डॉक्टर उनका टेस्ट कर रहे हैं। सभी भारतीय अंतरिक्ष यात्री अच्छे स्वास्थ्य में हैं, और अपने प्रशिक्षण को जारी रखने के लिए दृढ़ हैं। अब तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों ने किसी दुर्घटना के परिणाम स्वरुप असामान्य लैंडिंग का, जंगली सर्द क्षेत्रो में, पानी की सतह पर व गर्म इलाको के मैदान पर, प्रशिक्षण फरवरी, जून और जुलाई में ले लिया है। अभी अंतरिक्ष यात्रियों को भविष्य में कई मुश्किल ट्रेनिंग से गुजरना है। गावकोस्मोस की वेबसाइट ने भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के उच्च प्रेरणा, अत्यंत गंभीर और बहुत ही पेशेवर रवैये की सराहना की है। 

गगनयान (Gaganyaan) के लिए रूस बना रहा है स्पेस सूट 

भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के लिए व्यक्तिगत उपकरण किट के उत्पादन और वितरण के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर 11 मार्च 2020 को इसरो के मानव स्पेसफ्लाइट सेंटर और मानव स्पेसफ्लाइट सेंटर द्वारा हस्ताक्षर किए गए।

Glavkosmos के साथ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के ह्यूमन स्पेसफ्लाइट सेंटर ने, रूस में ट्रेनिंग ले रहे भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के लिए उपकरण बनाना शुरू कर दिया है। Glavkosmos के CEO, Dmitry Loskutov ने कहा,” 3 सितंबर को, भारतीय अंतरिक्ष यात्री, जोकि Glavkosmos के कॉन्ट्रैक्ट के तहत रूस में एक अंतरिक्ष यान का प्रशिक्षण ले रहे हैं, उन्होंने Zvezda का दौरा किया, जहाँ उनके मानवजनित मापदंडों को बाद के उत्पादन के लिए मापा गया। कॉन्ट्रैक्ट के तहत व्यक्तिगत सीटों और कस्टम-निर्मित सीट का निर्माण भी Glavkosmos को करना है।”

गगनयान (Gaganyaan) के लिए फ़्रांस प्रदान करेगा उपकरण 

हाल में ही इसरो ने यूट्यूब पर बताया की,” गगनयान (Gaganyaan) मिशन पूरे जोरो पर विकिसित हो रहा है। फ्रांस के National center for space studies (CNES) के साथ मिलकर ISRO की वार्ता उन्नत चरण पर है, जिसके अंतरगत दोनों आर्गेनाईजेशन गगनयान के लिए उपकरण बनाएंगे।”

ये उपकरण फ्रांस के मिशन अल्फ़ा में इस्तेमाल होने वाले उपकरण के समान होंगे। आगे बताया गया कि, “फ्रांस उन देशो में से है जो अपने अंतरिक्ष उपकरणों, विशेष रूप से चिकित्सा उपकरण के लिए विख्यात है।” इन उपकरणों को CNES की सहायक कंपनी, French institute of space medicine and physiology के द्वारा बनाया जाता है। अंतरिक्ष सर्जन यही से प्रशिक्षण लेते हैं। ISRO के एक अधिकरी के मुताबिक,” भारतीय अंतरिक्ष सर्जन अगले साल फ्रांस जायेंगे। अभी तक अंतरिक्ष यात्रियों के लिए विशेष उपकरणों को मुहैया कराने की सहमति नहीं हुयी है।”

स्पेसक्राफ्ट

गगनयान (Gaganyaan) मिशन में GSLV MK-III X लांचर का इस्तेमाल होगा। इसी लांचर के द्वारा crew module को अंतरिक्ष तक पहुंचाया जायेगा। GSLV MK-III एक हैवी लांच वेहिकल है जिसकी मदद से भारी चींजो को अंतरिक्ष में पहुंचाया जा सकता है। GSLV MK-III का इस्तेमाल चंद्रयान-2 मिशन में हुआ था। तथा इसको CARE के टेस्टिंग फ्लाइट में भी इस्तेमाल किया गया था। Hindustaan Aeronautics Limited (HAL) द्वारा तैयार किये गए crew module की मानव रहित टेस्टिंग 18 दिसंबर 2014 को किया गया था। Module का नाम Crew module Atmospheric Re-entry Experiment (CARE) रखा गया है। 

ISRO उपग्रहों को बनाने और उनको लांच करने के लिए जाना जाता है, एक साथ सबसे ज्यादा उपग्रह ISRO ने ही लांच किये हैं, लेकिन इस बार चुनौती अलग रहेगी, इस बार इंसानो को अन्तरिक्ष में भेजकर वापस लाना होगा, तथा अंतरिक्ष के वैक्यूम, जीरो ग्रेविटी, सौर लहरों, और अन्य खतरों से अंतरिक्ष यात्रियों को बचाना होगा। जोकि ISRO ने कभी नहीं किया। इसीलिए इस मिशन के सफल होने के साथ ही विश्व में ISRO और भारत का सर उँचा हो जायेगा, और ISRO को Space Exploration के लिए साहस और मौके दोनों मिलेंगे। 

गगनयान-1 को लेकर काफी उम्मीदे हैं, क्योंकि यही मिशन आगे के 2 मिशन की सफलताओं का आधार रखेगा। हालाँकि ISRO काम समय और लागत में कई मिशन को सफलतापूर्वक करके दिखाया है। जहाँ पर NASA ने 10 साल और 2 प्रयास में मंगल तक उपग्रह पंहुचा, वहीं ISRO सिर्फ 18 महीने और पहले कोशिश में मंगल तक उपग्रह पंहुचा दिया। बार-बार फंडिंग का रुक जाना ISRO के लिए समस्या रही है। 

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