OTT Plateform क्या है और क्या इसके ज़रिये आ सकती है सिनेमाई जगत में क्रांति?

OTT KYA HAI
What is OTT


Full Form:
OTT का पूर्ण रूप ओवर द टॉप(Over The Top) है।

English to Hindi Meaning: सबसे शीर्ष

क्या होता है OTT? [ In Hindi]

OTT का मतलब ओवर द टॉप है, सरल शब्दों में समझा जाये तो यह एक ऐसा plateform है जहां पर आपको वीडियो, फाइल या अन्य जरूरी सामान आसानी से उपलब्ध हो जाता है। 

OTT Plateform For Movies ( फिल्मों के लिए OTT)

OTT का इस्तेहमाल फिल्मों और वेब सीरीज को रिलीज़ करने के लिए किया जाता है। सरल शब्दों में कहें तो यह ऐसा प्लेटफार्म  है जहां पर फ़िल्में आसानी से दर्शकों तक पहुंच सकती हैं। यह ऐसा माध्यम है जिसके ज़रिये फिल्मों को आसानी से अपने फ़ोन, स्मार्ट टीवी, लैपटॉप और टैबलेट्स में stream कर सकते हैं। ऐसा करना सबसे सरल है, यह माध्यम बड़ी ही सरलता से फिल्मों को आपके घर तक पहुँचाता है। 

OTT apps in India [In Hindi]  

OTT के कई विदेशी ऍप्लिकेशन्स हैं और कुछ भारत के खुद की हैं, विदेशी apps की बात करें तो इसमें नेटफ्लिक्स और अमेज़न प्राइम सबसे हिट हैं। इनकी branches इंडिया में भी हैं और भारत में इनके मैनेजर्स और डिजिटल मार्केटिंग से जुड़े लोग भी भारतीय हैं। 
भारतीय OTT apps की बात करें तो ऑल्ट बालाजी, ज़ी 5, हॉटस्टार, उल्लू और सोनी लाइव सबसे मशहूर हैं। 
आज यह एप्लीकेशन फिल्मों को अपने माध्यम से रिलीज़ करके करोड़ों का मुनाफा कमा रही हैं, यह सभी प्लैटफॉर्म्स मुफ्त में नहीं हैं, अगर आपको इनमें फ़िल्में देखना है तो मासिक या सालाना भुगतान करना होगा। 

Lockdown में OTT में बढ़ोत्तरी

कोरोना वायरस ने सभी ज़िन्दिगियों को झकझोर कर रख दिया है, ऐसे में भला भीड़ के बीच जाकर कौन अपनी ज़िंदगी जोखिम में डालना चाहेगा। भारत सरकार बहुत पहले ही थिएटर्स बंद कर चुकी है ऐसे में फिल्मों को थिएटर में रिलीज़ करने का सवाल ही नहीं उठता। कई फिल्मों की रिलीज़ टाल दी गयी ऐसे में फिल्मों से जुड़े लोगों की आय भी रुक गयी। ऐसे कठिन वक्त में फिल्म निर्माताओं के पास फ़िल्में रिलीज़ करने का सिर्फ एक ही माध्यम बचा वह था OTT. इस वजह से OTT प्लेटफॉर्म के व्यवसाय में उछाल आयी है। 

क्या OTT सिनेमाई जगत में लाएगा क्रांति? (Will OTT bring revolution in Filmy World?) 

इस सवाल का उत्तर है हाँ, OTT सिनेमा जगत में एक क्रांति लेकर आया है। इससे लोग घरों में बैठ कर फ़िल्में देख सकते हैं वो भी रिलीज़ के उसी दिन। लॉकडाउन के दिनों में कई बॉलीवुड और हॉलीवुड फ़िल्में इसी प्लेटफॉर्म में रिलीज़ की जा रही हैं। हालांकि फिल्मों को थिएटर में रिलीज़ करने में ज़्यादा मुनाफा होता है और प्रॉफिट में कुछ हिस्सा अभिनेताओं को भी दिया जाता है। ott में ऐसा कुछ नहीं होता अभिनेताओं को एक बंधी रकम मिलती है। फिल्म को थिएटर्स में डिस्ट्रीब्यूट करने के लिए डिस्ट्रीब्यूटर्स काम आते हैं मगर अब अगर फिल्म ott पर रिलीज़ होती है तो डिस्टीब्युटर्स का काम ही खत्म यानी की उनकी आय पर अल्पविराम लग गया। 
पहले फ़िल्में ओटीटी पर तब रिलीज़ होती थीं जब वह सिनेमा से हट जाती थीं या फिर उन फिल्मों को रिलीज़ किया जाता था जो सिनेमाहॉल में किसी कारणवश नहीं लग पाती थीं। अब लॉकडाउन में ज्यादातर फिल्मों को रिलीज़ करना मज़बूरी है, हालांकि इससे थिएटर्स की अहमियत नहीं कम होजाती, जब थिएटर्स दोबारा खुलेंगे और सिचुएशन नार्मल हो जायेगी तब फिर से फ़िल्में थिएटर में ही रिलीज़ की जाएंगी। 
फिल्में देखना का असली मज़ा थिएटर्स में ही आता है। इस समय थिएटर्स मालिकों की आय रुकी हुई है यह देश की बड़ी समस्या है क्योंकि थिएटर्स से सरकार को एक बड़ी संख्या में टैक्स मिलता है। 
कई ऐसी फ़िल्में हैं जो थिएटर्स में नहीं रिलीज़ हो पातीं ऐसे में उनके लिए ओटीटी मसीहा है। फिल्म से जुड़े लोग अपना काम इस माध्यम से लोगों को अपना काम दिखा सकते हैं। वाकई है न यह एक क्रांतिकारी पहल?
हाल ही में कई फिल्म निर्माताओं ने अपनी फ़िल्में ओटीटी पर रिलीज़ करने का फैसला लिया हुआ है जिसमें अक्षय कुमार की लक्ष्मी बॉम्ब, अजय देवगन की भुज भी शामिल है, हालांकि सालमन खान की राधे और अक्षय की सूर्यवंशी को इस माध्यम के ज़रिये नहीं रिलीज़ किया जा सकता क्योंकि यह कमर्शियल फ़िल्में हैं जिन्हे बड़े बजट और नयी तकनीक के सहारे बनाया गया है, लिहाज़ा इन्हे देखने का असली मज़ा थिएटर्स में ही है। इन फिल्मों को इस माध्यम में रिलीज़ करने पर उतना फायदा नहीं होगा जितना की थिएटर्स से होता है।
India एक ऐसा खूबसूरत देश है जहां कई भाषाएँ बोली जाती हैं। लिहाज़ा एक ही फिल्म को कई भाषाओँ में डब करके रिलीज़ करना एक चुनौतीपूर्ण काम है, जैसे की तमिल, तेलुगु, मलयालम, बंगाली, कन्नड इत्यादि। ओटीटी इसे सरल बनाता है, यहां कई भाषाओं में फ़िल्में एक ही प्लेटफॉर्म में रिलीज़ कर दी जाती हैं, जिससे दर्शक अपनी इच्छा अनुसार भाषा चुन सकते हैं। इससे फिल्मों की पहुँच और भी ज्यादा बढ़ जाती है।

OTT vs थिएटर्स 

जहां थिएटर्स में सेंसर बोर्ड द्वारा प्रतिबंधित सीन्स काट दिए, वहीँ ओटीटी में ऐसा कुछ नहीं होता। ओटीटी में सभी तरह की फ़िल्में रिलीज़ करने की अनुमति है। 
जहां थिएटर्स में बैठकर फिल्म देखने का अनुभव सबसे बेहतरीन और अलग होता है वहीँ छोटी स्क्रीन्स पर इन्हें देखने का मज़ा कम हो जाता है। 
स्पेशल इफेक्ट्स, स्पेशल साउंड इफेक्ट्स का अनुभव अच्छी तरह से थिएटर्स में ही लिया जा सकता है। 
ओटीटी से कम मुनाफा होता है वहीँ थिएटर्स में फ़िल्में रिलीज़ करने से फिल्म निर्माताओं को भारी मुनाफा होता है। 
इस वक़्त थिएटर्स मालिकों पर फिल्मों के ओटीटी पर रिलीज़ होने को लेकर काफी ज्यादा तनाव है। आइनॉक्स, पीवीआर और कार्निवाल सिनेमा ने तो अपना दुःख ट्विटर पर प्रकट किया था की फिल्मों को डायरेक्ट ओटीटी पर न रिलीज़ किया जाए। उन्होंने फिल्म निर्माताओं से अपील की थी की महौल सामान्य होने तक इंतज़ार कर लें जब थिएटर्स खुलेंगे तो फिल्मों को यहीं रिलीज़ करलें।


लेख का सार: फिल्मों का ओटीटी पर डायरेक्ट रिलीज़ होना, कुछ कारणों को ध्यान में लेकर देखें तो एक क्रांतिकारी कदम है और कुछ कारणों को देखें तो दुखदायी है। लिहाज़ा स्थितियां नार्मल होने पर फिल्मों को थिएटर्स में ही हर निर्माता पहले रिलीज़ करना चाहेगा। 

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *